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बैंक खाते के फ्रीज़ पर 90 दिन का नियम — कब लागू होता है और कैसे लागू कराएँ

लेखक: विक्रम सिंह कुशवाहा, अधिवक्ता (बार काउंसिल ऑफ़ दिल्ली, D/7747/2017) · अद्यतन: जुलाई 2026

संक्षिप्त उत्तर: ऐसा कोई स्वतः नियम नहीं है कि हर साइबर फ्रीज़ 90 दिन में अपने-आप खत्म हो जाए। लेकिन MHA SOP 2026 ने पहली बार एक निश्चित समय-सीमा दी है: जहाँ विवादित राशि ₹50,000 से कम है और कोई अदालती आदेश नहीं है, वहाँ बैंक से 90वें दिन फ्रीज़ हटाने की अपेक्षा है। इस पन्ने पर नियम, उसकी शर्तें, गिनती का तरीक़ा और पालन न होने पर कदम-दर-कदम रास्ता दिया गया है।

नियम क्या कहता है

NCRP/CFCFRMS नोटिस या धारा 106 BNSS लियन/ज़ब्ती से लगे साइबर-फ्रॉड फ्रीज़ में, जहाँ विवादित राशि ₹50,000 से कम है और बीच में कोई न्यायिक आदेश नहीं आया, बैंक को मूल निर्देश की तारीख़ से 90वें दिन फ्रीज़ हटाना है। कम-राशि के इन मामलों में SOP लेन-देन की पुष्टि के अधीन, बिना कोर्ट-आदेश के रिफंड की भी परिकल्पना करती है। 2026 से पहले ऐसी कोई प्रशासनिक समय-सीमा थी ही नहीं — कम राशि का फ्रीज़ भी अनिश्चित काल तक चल सकता था।

लागू होने की तीन शर्तें

90 दिन की गिनती

गिनती जाँच एजेंसी द्वारा बैंक को जारी मूल निर्देश की तारीख़ से होती है। बैंक की लिखित सूचना में लियन/फ्रीज़ की तारीख़ हो तो वही संदर्भ-तारीख़ है; साफ़ न हो तो बैंक से लिखित में पुष्टि माँगिए — SOP के तहत बताना बैंक का दायित्व है। बिना न्यायिक आदेश के नया प्रशासनिक निर्देश घड़ी दोबारा शुरू नहीं करता, वरना बार-बार निर्देश भेजकर नियम को ही निष्फल किया जा सकता था।

90 दिन पूरे होने पर क्या करें

  1. दिन 85: बैंक के नोडल अधिकारी और IO — दोनों को लिखित स्मरण-पत्र, जिसमें SOP, 90-दिन की खिड़की और मूल निर्देश की तारीख़ का उल्लेख हो।
  2. दिन 90: फ्रीज़ न हटे तो ज़िला शिकायत निवारण अधिकारी के समक्ष उल्लंघन की लिखित शिकायत। उनसे 15 दिनों में जवाब अपेक्षित है।
  3. दिन 105: जवाब न आए तो एस्केलेशन अपीलीय/राज्य-स्तरीय शिकायत अधिकारी की ओर बढ़ता है।
  4. उसके बाद: प्रशासनिक रास्ते विफल हों तो हाई कोर्ट की रिट — SOP, 90-दिन का उल्लंघन और दस्तावेज़ी अभ्यावेदनों के आधार पर रिलीज़ के निर्देश की माँग। अंतरराज्यीय मामलों में रिट का रास्ता अक्सर मजिस्ट्रेट-आवेदन से तेज़ नतीजा देता है।

ब्रांच से EDD ग्रिवांस — समानांतर शॉर्टकट

90 दिनों का इंतज़ार करते हुए भी ब्रांच मैनेजर से कहिए कि वे NCRP पोर्टल पर आपकी ओर से EDD ग्रिवांस दर्ज करें — बैंक अपने ग्राहक का KYC सत्यापित कर सीधे साइबर सेल को सकारात्मक रिपोर्ट भेज सकता है। यह रास्ता अक्सर 20–30 दिनों में डेबिट फ्रीज़ हटवाकर लियन केवल विवादित राशि तक सीमित करा देता है। पूरी प्रक्रिया: फ्रीज़ खाता खुलवाने की हिंदी गाइड; व्यापक संदर्भ: MHA SOP 2026 की व्याख्या

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

90 दिन का बैंक फ्रीज़ नियम क्या है?
MHA SOP 2026 का प्रावधान, जिसके अनुसार जहाँ विवादित राशि ₹50,000 से कम है और कोई अदालती आदेश नहीं है, वहाँ बैंक को साइबर-फ्रॉड फ्रीज़ 90 दिनों में हटाना है।

यह नियम कब लागू होता है?
तीन शर्तें — आपके खाते से जुड़ी विवादित राशि ₹50,000 से कम हो; फ्रीज़ प्रशासनिक निर्देश (NCRP या धारा 106 BNSS) से लगा हो, अदालत से नहीं; और 90 दिनों के भीतर किसी अदालत ने रोक बढ़ाने का आदेश न दिया हो।

यह नियम कब लागू नहीं होता?
राशि ₹50,000 या उससे अधिक हो, अदालती आदेश हो, फ्रीज़ PMLA/आयकर जैसे अलग क़ानून के तहत हो, कारण साइबर-शिकायत न होकर KYC या बैंक-वसूली हो, या खाता स्वयं संदिग्ध-खाते के रूप में जाँच में हो।

90 दिन की गिनती कैसे होती है?
जाँच एजेंसी द्वारा बैंक को जारी मूल निर्देश की तारीख़ से। बिना न्यायिक आदेश के दोहराया गया प्रशासनिक निर्देश घड़ी को दोबारा शुरू नहीं करता।

खाता अब भी फ्रीज़ है या पैसा अटका है?

बैंक का संदेश, विवादित राशि और (यदि पता हो) शिकायत का राज्य साझा कीजिए — SOP-अनुरूप रास्ते का संरचित आकलन मिलेगा।

यह लेख केवल सामान्य कानूनी जानकारी के लिए है; यह कानूनी सलाह नहीं है और इससे अधिवक्ता-मुवक्किल संबंध नहीं बनता।