CPGRAMS: सरकारी शिकायत ऐसे दर्ज कीजिए कि जवाब आए
लेखक: विक्रम सिंह कुशवाहा, अधिवक्ता (बार काउंसिल ऑफ़ दिल्ली, D/7747/2017) · अद्यतन: जुलाई 2026
भारत का हर केंद्रीय मंत्रालय, विभाग और सरकारी बैंक शिकायतों की एक ही पाइपलाइन से जुड़ा है: CPGRAMS — pgportal.gov.in। सही तरीक़े से इस्तेमाल करें तो यह नागरिक के हाथ का सबसे सस्ता क़ानूनी दबाव है: नंबर वाली, समय-सीमा वाली, ट्रैक होने वाली माँग कि एक तय अफ़सर एक तय चूक का जवाब दे। लापरवाही से इस्तेमाल करें, तो वही एक-लाइन वाला "निस्तारित" जिसकी सब शिकायत करते हैं।
CPGRAMS क्या है — और क्या नहीं है
आपकी शिकायत ज़िम्मेदार मंत्रालय/विभाग तक जाती है, रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है, और घड़ी चालू हो जाती है। 2024 के सुधारों के बाद समाधान का लक्ष्य 21 दिन है (पहले 30); ज़्यादा समय लगे तो विभाग को अंतरिम जवाब देना होता है — कारण और अनुमानित तारीख़ के साथ। बंद होने पर एक्शन टेकन रिपोर्ट मिलती है, आप रेटिंग देते हैं; ख़राब रेटिंग पर फीडबैक कॉल सेंटर से कॉल आ सकती है, और असंतोष पर 30 दिन के भीतर अपील होती है — वरिष्ठ अधिकारी (नोडल अपीलीय प्राधिकारी) के पास, जिसका अपना 30-दिन का लक्ष्य है।
जो यह नहीं है: अदालत। CPGRAMS मुआवज़ा नहीं दिला सकता, निजी विवाद तय नहीं कर सकता, कोई आदेश रद्द नहीं कर सकता। यह जवाब दिलाता है — और जो रिकॉर्ड बनता है, वही आगे लोकपाल/ओम्बड्समैन या हाई कोर्ट की रिट का आधार बनता है।
क्या दर्ज हो सकता है, क्या नहीं
दर्ज कीजिए: केंद्रीय विभाग की देरी या निष्क्रियता (पासपोर्ट, पेंशन, टैक्स रिफ़ंड, रेलवे, टेलीकॉम); सरकारी बैंक/बीमा कंपनियाँ (वित्तीय सेवाएँ विभाग — DFS के ज़रिये); योजना का लाभ न मिलना; किसी सरकारी प्राधिकरण का जवाब न देना।
यहाँ नहीं: अदालत में लंबित (sub judice) मामले; RTI आवेदन/अपील; निजी या पारिवारिक विवाद; सरकारी कर्मचारियों के सेवा-मामले (उनके अपने चैनल हैं)। भ्रष्टाचार/विजिलेंस आरोप दर्ज तो होते हैं पर CVC/DoPT की अलग प्रक्रिया में जाते हैं। और एक चेतावनी: झूठी या बार-बार बेवजह शिकायत करने वालों को पोर्टल पर ब्लॉक किया जा सकता है।
दर्ज करने के क़दम
- pgportal.gov.in पर एक बार रजिस्ट्रेशन (मोबाइल/ईमेल OTP; UMANG ऐप और CSC से भी)।
- सही मंत्रालय/विभाग चुनिए — यही एक चुनाव तय करता है कि जवाब कौन देगा। सरकारी बैंक का मामला = वित्तीय सेवाएँ विभाग (DFS)। राज्य का विषय (पुलिस, ज़मीन, नगर निगम) = राज्य का अपना पोर्टल (दिल्ली का अपना PGMS है)।
- शिकायत रिकॉर्ड की तरह लिखिए, ग़ुस्से की तरह नहीं — तारीख़ें, रेफ़रेंस नंबर, कौन-सा नियम/वादा टूटा, और आप ठीक-ठीक क्या चाहते हैं। दस्तावेज़ एक PDF में जोड़िए।
- रजिस्ट्रेशन नंबर सँभालिए — ट्रैकिंग से अपील तक सब इसी पर टिका है।
- पोर्टल के अंदर ही जवाब दीजिए — फ़ोन पर दी गई सफ़ाई का कोई रिकॉर्ड नहीं बनता।
- बंद होने पर: रिपोर्ट पढ़िए। संतुष्ट — रेटिंग देकर बंद कीजिए। असंतुष्ट — रेटिंग भी दीजिए और 30 दिन के भीतर अपील भी कीजिए।
समय-सीमाएँ, एक नज़र में
- समाधान का लक्ष्य: 21 दिन (देरी पर अंतरिम जवाब अनिवार्य)
- अपील की खिड़की: बंद होने से 30 दिन
- अपील के समाधान का लक्ष्य: 30 दिन
अपील की खिड़की चूकी, तो शिकायत ख़त्म — फिर नई शिकायत या नया मंच।
हारकर भी क्या मिलता है
दर्ज-और-अपील की हुई CPGRAMS फ़ाइल सरकारी मुहर वाली तारीख़ों के साथ साबित करती है कि आपने माँगा, इंतज़ार किया, ऊपर तक गए और मना किया गया। यही रिकॉर्ड अगले दरवाज़े की चाबी है — बैंक मामलों में RBI लोकपाल, सेवा में कमी पर उपभोक्ता आयोग, और सरकारी निष्क्रियता पर हाई कोर्ट की रिट।
शिकायत अटकी है, या बिना जवाब बंद हो गई?
30 मिनट के परामर्श में आपकी पूरी फ़ाइल देखकर अगला सही मंच तय होता है — लोकपाल, उपभोक्ता आयोग या रिट — और अगला ठोस क़दम लिखित में मिलता है।
यह लेख केवल सामान्य कानूनी जानकारी के लिए है; यह कानूनी सलाह नहीं है। अंतिम समीक्षा: 10 जुलाई 2026। समय-सीमाएँ DARPG के 2024 दिशा-निर्देशों के अनुसार; ताज़ा स्थिति pgportal.gov.in पर देखें।